देवरिया।"स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी, कृषक व पूर्व सैनिक संगठन" के बैनर तले राष्ट्रवाद गांधी और आमजन विषय पर नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया के गांधी सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में राष्ट्र एवं छद्म राष्ट्रवाद पर विस्तार से चर्चा करते हुए आज के दौर में अंतर्राष्ट्रीयता के महत्व को रेखांकित किया गया।
गोष्ठी में बोलते हुए अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ कृष्णा जायसवाल ने कहा कि हमें आज मानवता को केंद्र में रखते हुए अपनी नीतियां बनानी होगी।देश दुनिया के किसी भी हिस्से की मानवीय भावनाओं को आहत करने का भाव नहीं होना चाहिए।कश्मीर में लगे प्रतिबंध हृदय को विदीर्ण करने वाले हैं। वक्ताओं ने राष्ट्रीय मुक्ति संग्राम और आज वैश्वीकरण के संदर्भ पर विस्तार से चर्चा करते हुए दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए पहला यह कि हम भारत के राष्ट्रीय मुख्य संग्राम सेनानियों के साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष की एकजुटता का सम्मान करते हैं और उनके बीच विभाजन करने और विवाद पैदा करने के प्रयासों का पुरजोर विरोध करते हैं। दूसरा प्रस्ताव यह कि हम तमाम राष्ट्रीयताओं की अस्मिता का सम्मान करते हैं और राष्ट्रवाद के नाम पर दूसरी राष्ट्रीयताओं के दमन की क्रूरता पूर्ण कार्रवाई की निंदा करते हैं। साथ ही केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि कश्मीर के अमानवीय दमन और असंवैधानिक तरीके से लगाए गए पाबंदियों को तत्काल समाप्त किया जाए।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए किसान नेता शिवाजी राय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के केंद्र में उसकी भाषा होती है धर्म के नाम पर किसी राष्ट्र का निर्माण सर्वथा अतार्किक और असंगत रहा है, जिसका परिणाम भारत भुगत रहा है ।उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर अगर राष्ट्रीयताओं का निर्माण हो रहा होता तो अरब देशों से लेकर पूरे यूरोप तक के सारे देश धर्म के आधार पर इस्लामिक या ईसाई राष्ट्र के रूप में जाने जाते ।
पूर्व विधायक सुभाषचंद श्रीवास्तव ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम के आखिरी समय में राष्ट्रवाद का नाम बहुत अधिक उछाला गया। द्वि राष्ट्रवाद की बात की गई जिसमें जिन्ना से लेकर सावरकर तक लोगों ने नकारात्मक वातावरण पैदा किए और भारत का विभाजन हो गया।
कार्यक्रम में जनार्दन प्रसाद शाही, डॉक्टर चतुरानन ओझा, डॉ शकुंतला दीक्षित, कॉमरेड बाबूराम शर्मा, हृदय नारायण जयसवाल, सोहेल अंसारी ,सुभाष राय ,घनश्याम त्रिपाठी, गंगासागर गुप्त,सौदागर सिंह, सरोज पांडे, उत्तेज मिश्र, शिव प्रकाश मिश्र ,महेंद्र प्रताप अंबेडकर ,सभापति मिश्र, संजयदीप कुशवाहा आदि ने विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन कर्नल प्रमोद शर्मा ने किया।