मातृभाषा को बचाना हमारे समय की जरूरत: प्रद्युम्न दुबे
* अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा सप्ताह समापन समारोह
चौरी चौरा, गोरखपुर।
क्षेत्र के राम रहस्य महाविद्यालय सिंहपुर में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा सप्ताह के समापन अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का आयोजन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास गोरक्ष प्रांत द्वारा किया गया। संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि क्षेत्र के जाने-माने शिक्षाविद प्रद्युम्न दुबे ने संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपनी मातृभाषा की रक्षा करने के लिए हर तरह के प्रयास करने चाहिए । आज का समय बाजार का समय है बाजार की अपनी संस्कृति है । उन्होंने ने कहा कि हर संस्कृति की अपनी भाषा होती है और हर भाषा की अपनी संस्कृति । आज के समय में बाजारवादी शक्तियां अपनी संस्कृति को हमारे ऊपर थोप रही हैं । जिससे कि हमारी भारतीय संस्कृति जिसे हम वसुधैव कुटुंबकम की संज्ञा देते हैं उसकी भावना कमजोर हो रही है। श्री दुबे ने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा हिंदी और भोजपुरी जो कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान बनी हुई है इस पर हो रहे बाजार के हमलों से इसे बचाने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि आज हमारी भोजपुरी अश्लीलता का पर्याय बनती जा रही है और हम भोजपुरी के महान रचनाकारों और उनके साहित्य को भूलते जा रहे हैं यह चिंताजनक बात है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा के साथ साथ दूसरों की मातृ भाषाओं का भी पूरा सम्मान करना चाहिए।
इस अवसर पर बोलते हुए बतौर विशिष्ट अतिथि और सामाजिक कार्यकर्ता राम सिंहासन तिवारी ने कहा कि छात्रों नौजवानों को आगे आकर अपनी मातृभाषा को बचाने का प्रयास करना चाहिए हमारी सरकारों को चाहिए कि शिक्षा का माध्यम मातृभाषा को बनाए क्योंकि बालक जब मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करता है तो वह अधिक सीखता है। अपनी भाषा में सीखी हुई बात आजीवन स्मरण रहती है। श्री तिवारी ने कहा कि आज हिंदी और भोजपुरी बोलना और पढ़ना सम्मान जनक नहीं माना जा रहा है हमें इस भावना से ऊपर उठना होगा और अपनी मातृभाषा को सम्मान देना होगा। क्योंकि मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं होता।
संगोष्ठी में बोलते हुए महाविद्यालय के प्रबंधक गिरीश राज त्रिपाठी ने कहा कि छात्रों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने के साथ-साथ भाषा की रक्षा करने के लिए भी हमेशा तैयार रहना चाहिए। क्योंकि जब भाषा रहेगी तभी हम अपने समाज को बचा पाएंगे, एक सुंदर समाज बना पाएंगे ,अपने लोकतंत्र को बचा पाएंगे । हमें अपनी मातृभाषा को पूरे सम्मान के साथ पढ़ना होगा, सीखना होगा और उसका प्रचार प्रसार करना होगा अन्यथा पाश्चात्य संस्कृति हमारे ऊपर हावी हो जाएगी और हमारी भारतीय संस्कृति कमजोर होगी।
संगोष्ठी में अतिथियों का आभार ज्ञापन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने किया एवं संचालन विजय यादव ने किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से कृष्ण कुमार त्रिपाठी , वीरेंद्र यादव, सुशील तिवारी, शैलेश त्रिपाठी ,अभय त्रिपाठी,वंदना जयसवाल, अर्चना राय, प्रवेश कुमार श्रीवास्तव , मनोज प्रजापति आदि मौजूद रहे।